Friday, 30 September 2016

अमिताभ : इसको लगा डाला मतलब फॅमिली जिंगालाला

 
amitabh bachchan in tata sky tvc ad

बात पते की, यदि आप एंग्रीमेन मतलब बिग बी मने अमित जी के गजब के फेन है तो यह आर्टिकल आप पर कुर्बान है चूँकि रिश्ते में तो हम तुम्हारे....नाम है .....को दिलो जान से चाहते है. हमारे कुली नंबर वन फिल्म जगत में आए दिन कुछ न कुछ नया करते रहते है, उनके कर्मकांड से उनकी उम्र का पता ही नहीं चलता है.

ऐसा लगता है जैसे बच्चन साहब फिर से बचपने में चले गए है और एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे है, वे फिर जवान होंगे...फिर बूढ़े होंगे...और फिर दिल तो बच्चा है जी. अमितजी कभी कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट, तो कभी नवरत्न तेल...ठंडा-ठंडा कूल-कूल में और कभी दिवार,जंजीर,अमर अकबर अन्थोनी,डॉन,अग्निपथ,ब्लैक,पा,पिकू जैसी विचित्र और चुनौतीपूर्ण फिल्मे करने के बाद आज बॉलीवुड में ही नहीं पूरी दुनिया में वे एक अलग पहचान के साथ जाने जाते है. 

जब अमिताभ बच्चन साहब बीमार होने पर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके अच्छे होने की प्रार्थना करने लागा और वे शीघ्र ठीक हो गए.एंग्रीमेन का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक और दिलचस्प है, उनकी एक्टिंग भी अपने आप में किसी हकीकत से कम नहीं है. 

Source- mj786

हाल ही में अपने बच्चन साहब ने एक विज्ञापन किया है जो Tata sky company का है, जिसका प्रिय डायलॉग है टाटा स्काई लगा डाला तो..लाइफ जिंगा लाला...और इसी कंपनी का विज्ञापन हमारे शहंशाह ने किया है...आप भी देखे और शेयर करे और लाइफ को जिंगा लाला बनाए !

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अमिताभ : इसको लगा डाला मतलब फॅमिली जिंगालाला

 
amitabh bachchan in tata sky tvc ad

बात पते की, यदि आप एंग्रीमेन मतलब बिग बी मने अमित जी के गजब के फेन है तो यह आर्टिकल आप पर कुर्बान है चूँकि रिश्ते में तो हम तुम्हारे....नाम है .....को दिलो जान से चाहते है. हमारे कुली नंबर वन फिल्म जगत में आए दिन कुछ न कुछ नया करते रहते है, उनके कर्मकांड से उनकी उम्र का पता ही नहीं चलता है.

ऐसा लगता है जैसे बच्चन साहब फिर से बचपने में चले गए है और एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे है, वे फिर जवान होंगे...फिर बूढ़े होंगे...और फिर दिल तो बच्चा है जी. अमितजी कभी कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट, तो कभी नवरत्न तेल...ठंडा-ठंडा कूल-कूल में और कभी दिवार,जंजीर,अमर अकबर अन्थोनी,डॉन,अग्निपथ,ब्लैक,पा,पिकू जैसी विचित्र और चुनौतीपूर्ण फिल्मे करने के बाद आज बॉलीवुड में ही नहीं पूरी दुनिया में वे एक अलग पहचान के साथ जाने जाते है. 

जब अमिताभ बच्चन साहब बीमार होने पर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके अच्छे होने की प्रार्थना करने लागा और वे शीघ्र ठीक हो गए.एंग्रीमेन का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक और दिलचस्प है, उनकी एक्टिंग भी अपने आप में किसी हकीकत से कम नहीं है. 

Source- mj786

हाल ही में अपने बच्चन साहब ने एक विज्ञापन किया है जो Tata sky company का है, जिसका प्रिय डायलॉग है टाटा स्काई लगा डाला तो..लाइफ जिंगा लाला...और इसी कंपनी का विज्ञापन हमारे शहंशाह ने किया है...आप भी देखे और शेयर करे और लाइफ को जिंगा लाला बनाए !

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Thursday, 29 September 2016

अब भगवान भरोसे भारत-पाक फिल्म उद्योग

Pakistan vs Indian film industry
भारत पाकिस्तान के बीच जिस प्रकार का द्वन्द यद्ध चल रहा है उसे देखकर लगता है पाकिस्तान पर आने वाले समय में संकट के बादल और गहरे छा जाएंगे. इसके चलते पाकिस्तान के फिल्म उद्योग को भी चिंता सताने लगी  है कि अगर भारत-पाकिस्तान संबंध और ज्यादा बदतर होते हैं और साथ ही देश में हिन्दी फिल्मों पर प्रतिबंध लग जाता है तो उसे लगभग 70 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

साथ ही भारतीय फिल्म जगत में काम करने वालो को भी डर है कि अगर यह स्थिति बेहतर नहीं हो पाती है तो फिर आगे भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की आवाज उठेगी।मशहूर जाने-माने प्रदर्शकवितरक और एट्रियम सिनेप्लेक्स सीरीज़ के मालिक नदीम मंडविवल्ला का कहना है कि 'मैं निराशावादी बातें नहीं करना चाहता हूं लेकिन सच्चाई यह है कि नई हिन्दी और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रदर्शित होने के कारण पिछले कुछ साल में पाक के फिल्म उद्योग को एक उंचाई मिली है जो काफी सराहनीय बात है।

Bollywood actress

उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

एक और फेमस फिल्म समीक्षक उमर अलवी ने कहा कि सिनेमा के पर्दों और टैक्स में बढ़ोतरी के कारण भी पाकिस्तानी फिल्म उद्योग का पुनरुत्थान हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि, 'कई पाकिस्तानी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं और अच्छा काम कर रही हैं और कई अन्य प्रदर्शित होने के लिए कतार में लगी हैंलेकिन किसी सिनेमा जगत को सुचारू रूप से बने रहने के लिए एक साल में कम से कम 50 से 60 फिल्मों का निर्माण करना चाहिए जो हम इस वक्त कर पाने में असमर्थ हैं।

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साथ ही भारतीय फिल्म जगत में काम करने वालो को भी डर है कि अगर यह स्थिति बेहतर नहीं हो पाती है तो फिर आगे भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की आवाज उठेगी।मशहूर जाने-माने प्रदर्शकवितरक और एट्रियम सिनेप्लेक्स सीरीज़ के मालिक नदीम मंडविवल्ला का कहना है कि 'मैं निराशावादी बातें नहीं करना चाहता हूं लेकिन सच्चाई यह है कि नई हिन्दी और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रदर्शित होने के कारण पिछले कुछ साल में पाक के फिल्म उद्योग को एक उंचाई मिली है जो काफी सराहनीय बात है।

Bollywood actress

उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

एक और फेमस फिल्म समीक्षक उमर अलवी ने कहा कि सिनेमा के पर्दों और टैक्स में बढ़ोतरी के कारण भी पाकिस्तानी फिल्म उद्योग का पुनरुत्थान हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि, 'कई पाकिस्तानी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं और अच्छा काम कर रही हैं और कई अन्य प्रदर्शित होने के लिए कतार में लगी हैंलेकिन किसी सिनेमा जगत को सुचारू रूप से बने रहने के लिए एक साल में कम से कम 50 से 60 फिल्मों का निर्माण करना चाहिए जो हम इस वक्त कर पाने में असमर्थ हैं।

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नवरात्रि में ऐसे होगी आपकी मनोकामना पूर्ण


शारदीय नवरात्रि में देवी साधना का विशेष महत्व है, नवरात्रि में माता के नो स्वरूपों का पूजन अर्थात साधना की जाती है. नवरात्रि में देवी का प्रत्येक दिन उनके एक विशेष रूप को लेकर होता है. यदि कोई भक्त अपनी कोई इच्छा या मनोकामना से देवी के उस विशेष रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही माता की अनुकम्पा प्राप्त कर लेता है.

यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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शारदीय नवरात्रि में देवी साधना का विशेष महत्व है, नवरात्रि में माता के नो स्वरूपों का पूजन अर्थात साधना की जाती है. नवरात्रि में देवी का प्रत्येक दिन उनके एक विशेष रूप को लेकर होता है. यदि कोई भक्त अपनी कोई इच्छा या मनोकामना से देवी के उस विशेष रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही माता की अनुकम्पा प्राप्त कर लेता है.

यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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नवरात्रि : नो माताओं का होगा अपने लालों से मिलन













देवी जगदम्बा की नो शक्तियां अर्थात नो स्वरुप है जिनके प्रथक-प्रथक नाम इस प्रकार से है:
प्रथम का नाम शैल पुत्री(जिन माता ने पारवती देवी के रूप में पर्वत राज हिमालय के घर में जन्म लिया), दूसरी शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी(ये वो शक्ति है जो परब्रह्म का साक्षात्कार कराती है), माता की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा है अर्थात जिस देवी के घंटा में चन्द्रमा स्थित है. 

इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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Wednesday, 28 September 2016

नवरात्रि में विधि-विधान से पूजन करने के नियम



पुराणों में पूजन की पांच विधियाँ बताई गई है, पहला सफाई(अभिगमन) दूसरा उपादान(गंध पुष्प आदि पूजन सामग्री का संग्रह) तीसरा योग(अपने इष्ट देव की आत्मरूप से भावना करना) चौथा सवाध्याय(मन्त्र जप, सूक्त स्त्रोत, नाम गुण आदि का कीर्तन करना) पांचवा इज्या(इसमें षोडषोपचार अर्थात सोलह प्रकार के उपचार सम्मिलित है.

यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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हिन्दुधर्म में क्यों मनाते है नवरात्रि


नवरात्रि महत्व: हिन्दुओं में धार्मिक उत्सवों का विशेष महत्व है जिसमे नवरात्री सबसे पहले नंबर पर आती है, हिन्दुओं में मान्यता अनुसार कई मत प्रचलित है लेकिन शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जहाँ नवरात्री पूजन का विधान न हो. नवरात्रि के 9 दिनों में माँ भगवती के नो रूपों की विशेष पूजा का विधान है. बहुत से लोग बस इतना ही जानते है कि नवरात्रि दो प्रकार की होती है, एक बासंती(चेत्र) नवरात्रि दूसरी शारदीय नवरात्रि. लेकिन हम धर्मशास्त्रों का अध्ययन करें तो एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है.


चेत्र नवरात्रि : वर्ष का प्रथम मास होने के कारण इसको चेत्र मास या मधुमास भी कहा जाता है, इस समय बसंत ऋतु का आगमन भी होता है.

आषाढ़ नवरात्रि: इस नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है, इस नवरात्रि में उग्र साधनाएं करने वाले तांत्रिक और अघोरी वीभत्स साधनाओं में लीन रहते है.

शारदीय नवरात्रि: यह नवरात्रि आश्विन शुक्ल में आती है, इसको वार्षिक नवरात्रि भी कहते है, चारों नवरात्रि में इसको ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.


माघ मास की नवरात्रि: यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि मानी जाती है. यह गुप्त पूजन के हिसाब से अत्यंत पवित्र नवरात्रि मानी जाती है. 

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रोचक कहानी : काल भैरव को कैसे मिली ब्रह्मा हत्या से मुक्ति
हे मानवों : सब्र करो कि करिश्मा है होने वाला
मैया मोरी तुमरे दरस की प्यासी मै

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नवरात्रि महत्व: हिन्दुओं में धार्मिक उत्सवों का विशेष महत्व है जिसमे नवरात्री सबसे पहले नंबर पर आती है, हिन्दुओं में मान्यता अनुसार कई मत प्रचलित है लेकिन शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जहाँ नवरात्री पूजन का विधान न हो. नवरात्रि के 9 दिनों में माँ भगवती के नो रूपों की विशेष पूजा का विधान है. बहुत से लोग बस इतना ही जानते है कि नवरात्रि दो प्रकार की होती है, एक बासंती(चेत्र) नवरात्रि दूसरी शारदीय नवरात्रि. लेकिन हम धर्मशास्त्रों का अध्ययन करें तो एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है.


चेत्र नवरात्रि : वर्ष का प्रथम मास होने के कारण इसको चेत्र मास या मधुमास भी कहा जाता है, इस समय बसंत ऋतु का आगमन भी होता है.

आषाढ़ नवरात्रि: इस नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है, इस नवरात्रि में उग्र साधनाएं करने वाले तांत्रिक और अघोरी वीभत्स साधनाओं में लीन रहते है.

शारदीय नवरात्रि: यह नवरात्रि आश्विन शुक्ल में आती है, इसको वार्षिक नवरात्रि भी कहते है, चारों नवरात्रि में इसको ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.


माघ मास की नवरात्रि: यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि मानी जाती है. यह गुप्त पूजन के हिसाब से अत्यंत पवित्र नवरात्रि मानी जाती है. 

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Saturday, 24 September 2016

वैश्यावृत्ति : मज़बूरी का शिकार या पापी प्यासी हवस


हम कई बार दबे छुपे शब्दों में उसका जिक्र करते है, प्रायः आदमी की दबी इच्छा उसके जिस्म को पाने की होती है... वह भी अपनी कामुक काया को परोसकर अपना पापी पेट पालती है. औरतें भी छुपकर उसके बारे में गॉसिप करने से बाज़ नहीं आती ! फिर भी इस सभ्य समाज में उसका नाम लेने से लब कांपते है, दिल थर्राता है, वो नाम है वैश्या....कॉलगर्ल....सेक्स वर्कर और न जाने कितने ऐसे नाम ? हर ख़ास और आम ये बात जानने की उत्कंठा रखता है कि ये कितने प्रकार की होती है ? ऐसी ही एक नारी की जुबानी हम आपको इस पेशे से रूबरू कराते है.

होम बेस्ड:- ये वो सेक्स वर्कर होती है जो अपने घरों में छिपकर धंधा चलाती है. प्रोफेशनल भाषा में इनको हिडन पापुलेशन कहा जाता है, यहाँ तक कि इनके आसपास के लोगो को भी इनकी भनक नहीं लगती, इनका काम होता है “चोरी-चोरी, चुपके-चुपके”.

स्ट्रीट बेस्ड:- ये वो वैश्याएँ होती है जो गलियों और सडको पर पाई जाती है, ये गलियां और सड़कें ही इनका पिक पॉइंट होता है. उदहारण के तौर पर देश की राजधानी दिल्ली का “रेड लाइट एरिया” जहां पर इनकी भरमार है.


हाईवे बेस्ड:- इस केटेगरी में वे वेश्याएं आती है, जो हाईवे या रोड पर मिलती है. खुले बाल, डार्क लिपस्टिक, शोख़ रंग के कपड़ों में सजी होती है. ड्राईवर इनके आसान शिकार होते है, इस कारण इनको HRG (हाई रिस्क ग्रुप) भी कहा जाता है. मंदसौर-नीमुच हाईवे पर इनकी भरमार है.

ढाबा बेस्ड:- ये वे सेक्स वर्कर है जो प्रायः ढाबों में पाई जाती है.... रंग-बिरंगे कपड़े,गहरा मेकअप व् शोख़ अदाओं के साथ ये ढाबों पर बैठी रहती है और वहीँ सौदा तय करती है.


होटल बेस्ड:- इस श्रेणी में वे महिलाऐ आती है जो होटल्स में पाई जाती है या कई बार होटल मालिक व् होटल के कर्मचारी इन सेक्स वर्कर्स को प्रोवाइड कराते है और अपने होटल रूम्स के एक्स्ट्रा चार्ज भी वसूलते है. कई बार अश्लील cd बनाकर भी उनके धंधे को चार चाँद लगा देते है, मतलब “आम के आम,गुट्लियों के दाम”.

कोठा बेस्ड:- इस केटेगरी में वे मासूम लड़कियां आती है जिनको धोखे से या किडनेपिंग या मज़बूरी में इस धंधे में उतारा जाता है. कोठे की मालकिन ही इन लड़कियों की मालकिन होती है जो इन दड़बेनुमा कमरों में इन गर्ल्स को रखकर इनसे ग्राहक पटवाती है और देह व्यापार करने को विवश करवाती है.



ट्रेडिशनल बेस्ड:- कई समाज जिनमे बाछड़ा व् बेड़िया समाजआदि शामिल है, उनमे परम्परागत देह व्यापार का व्यवसाय किया जाता है. इन परिवारों में लडकियां होने पर उत्साह मनाया जाता है. पारिवारिक सदस्य ही इनके दलाल होते है. परम्परागत देह व्यापार होने से यहाँ पर धंधा करना शर्म का विषय नहीं होता है.

पार्लर बेस्ड:- कई बार ब्यूटी पार्लर या मसाज पार्लर में भी इस तरह का देह व्यापार किया जाता है. मसाज के साथ-साथ देह उपलब्ध कराने के एक्स्ट्रा चार्ज लगते है. कई शौक़ीन मर्द भी यहाँ आते-जाते रहते है, जिनको अक्सर मुहं छुपाते हुए पुलिस की गिरफ़्त में खबरों के माध्यम से देखा जाता है.



कॉलगर्ल और बारगर्ल:- कॉलगर्ल वो होती है जो हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट से जुडी रहती है. इन्हें कॉल करके बुलाया जाता है, इन महिलाओं में मॉडल्स,कॉलेज गर्ल्स,स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस,हाउस वाइफ आदि आती है, जो अपनी असीमित आवश्यकताओं के चलते इस पेशे से जुड़ जाती है, जिनकी पहचान छुपी  रहती है. इसी प्रकार बारगर्ल्स भी बार में काम करते-करते इस तरह के धंधे से जुड़ जाती है.




ऐसा नहीं है कि यह कोई महिलाओं की विशेष प्रजातियाँ है, कोई भी नारी माँ की कोख़ से वैश्या बनकर जन्म नहीं लेती,बल्कि सदियों से पुरुषों की घृणित मानसिकता का शिकार होकर कभी नगर वधु तो कभी देवदासी और कभी तवायफ़ तो कभी वैश्या बनकर उनकी वासना का शिकार बनती है. बदलाव महिलाओं में नहीं, पुरुषों की सोच में होना चाहिए ताकि इस तरह के धधों पर विराम लग सके...”फ़ैसला आपका” 

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होम बेस्ड:- ये वो सेक्स वर्कर होती है जो अपने घरों में छिपकर धंधा चलाती है. प्रोफेशनल भाषा में इनको हिडन पापुलेशन कहा जाता है, यहाँ तक कि इनके आसपास के लोगो को भी इनकी भनक नहीं लगती, इनका काम होता है “चोरी-चोरी, चुपके-चुपके”.

स्ट्रीट बेस्ड:- ये वो वैश्याएँ होती है जो गलियों और सडको पर पाई जाती है, ये गलियां और सड़कें ही इनका पिक पॉइंट होता है. उदहारण के तौर पर देश की राजधानी दिल्ली का “रेड लाइट एरिया” जहां पर इनकी भरमार है.


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ढाबा बेस्ड:- ये वे सेक्स वर्कर है जो प्रायः ढाबों में पाई जाती है.... रंग-बिरंगे कपड़े,गहरा मेकअप व् शोख़ अदाओं के साथ ये ढाबों पर बैठी रहती है और वहीँ सौदा तय करती है.


होटल बेस्ड:- इस श्रेणी में वे महिलाऐ आती है जो होटल्स में पाई जाती है या कई बार होटल मालिक व् होटल के कर्मचारी इन सेक्स वर्कर्स को प्रोवाइड कराते है और अपने होटल रूम्स के एक्स्ट्रा चार्ज भी वसूलते है. कई बार अश्लील cd बनाकर भी उनके धंधे को चार चाँद लगा देते है, मतलब “आम के आम,गुट्लियों के दाम”.

कोठा बेस्ड:- इस केटेगरी में वे मासूम लड़कियां आती है जिनको धोखे से या किडनेपिंग या मज़बूरी में इस धंधे में उतारा जाता है. कोठे की मालकिन ही इन लड़कियों की मालकिन होती है जो इन दड़बेनुमा कमरों में इन गर्ल्स को रखकर इनसे ग्राहक पटवाती है और देह व्यापार करने को विवश करवाती है.



ट्रेडिशनल बेस्ड:- कई समाज जिनमे बाछड़ा व् बेड़िया समाजआदि शामिल है, उनमे परम्परागत देह व्यापार का व्यवसाय किया जाता है. इन परिवारों में लडकियां होने पर उत्साह मनाया जाता है. पारिवारिक सदस्य ही इनके दलाल होते है. परम्परागत देह व्यापार होने से यहाँ पर धंधा करना शर्म का विषय नहीं होता है.

पार्लर बेस्ड:- कई बार ब्यूटी पार्लर या मसाज पार्लर में भी इस तरह का देह व्यापार किया जाता है. मसाज के साथ-साथ देह उपलब्ध कराने के एक्स्ट्रा चार्ज लगते है. कई शौक़ीन मर्द भी यहाँ आते-जाते रहते है, जिनको अक्सर मुहं छुपाते हुए पुलिस की गिरफ़्त में खबरों के माध्यम से देखा जाता है.



कॉलगर्ल और बारगर्ल:- कॉलगर्ल वो होती है जो हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट से जुडी रहती है. इन्हें कॉल करके बुलाया जाता है, इन महिलाओं में मॉडल्स,कॉलेज गर्ल्स,स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस,हाउस वाइफ आदि आती है, जो अपनी असीमित आवश्यकताओं के चलते इस पेशे से जुड़ जाती है, जिनकी पहचान छुपी  रहती है. इसी प्रकार बारगर्ल्स भी बार में काम करते-करते इस तरह के धंधे से जुड़ जाती है.




ऐसा नहीं है कि यह कोई महिलाओं की विशेष प्रजातियाँ है, कोई भी नारी माँ की कोख़ से वैश्या बनकर जन्म नहीं लेती,बल्कि सदियों से पुरुषों की घृणित मानसिकता का शिकार होकर कभी नगर वधु तो कभी देवदासी और कभी तवायफ़ तो कभी वैश्या बनकर उनकी वासना का शिकार बनती है. बदलाव महिलाओं में नहीं, पुरुषों की सोच में होना चाहिए ताकि इस तरह के धधों पर विराम लग सके...”फ़ैसला आपका” 

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